- जमीयत उलेमा-ए-हिंद के विशेष अधिवेशन में देश व समाज के ज्वलंत मुद्दों पर होगी चर्चा
वसीम अकरम कुरैशी
जयपुर, राजस्थान
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हमेशा देश व समाज की समस्याओं को प्राथमिकता दी है। समाज में व्याप्त कुरीतियों और फिजूलखर्ची जैसी बुराइयों को समाप्त करना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। इसी सिलसिले में 1 दिसंबर, रविवार को शाम 6 बजे हसनपुरा हटवाड़ा स्थित मस्जिद ओलिया के समीप जमीयत का इजलास-ए-आम (अधिवेशन) आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वक्फ संशोधन बिल और समाज सुधार पर गहन चर्चा होगी। शनिवार को यहां होटल आरको पैलेस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कार्यक्रम के संयोजक मुफ्ती अखलार्कुरहमान कासमी ने कहा कि अधिवेशन में देश व समाज के ज्वलंत मुददें, समाज में फैली कुरीतियों, फिजूलखर्ची और आपसी झगड़ों को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया जाएगा। वे बोले-हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करना, गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखना, प्यार और मोहब्बत का पैगाम फैलाना हमारा उद्देश्य है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और समाज सुधार की अपील की है। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन बिल को पारित करना समुदाय और देश के लिए हानिकारक होगा। अधिवेशन का उद्देश्य न केवल वक्फ संपत्तियों की रक्षा करना है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और देश में भाईचारे की भावना को बनाए रखना है।
वक्फ संशोधन बिल धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ : कासमी
वहीं जमीयत उलेमा के प्रदेशाध्यक्ष मौलाना राशिद कासमी ने कहा कि प्रस्तावित वक्फ संशोधन बिल न केवल अल्पसंख्यकों बल्कि भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ है। वक्फ संपत्तियां मुस्लिम पूर्वजों द्वारा दान की गई अमानत हैं, जिन्हें धार्मिक उद्देश्यों के लिए दान किया गया था। अब यदि सरकार वक्फ संपत्तियों में हस्तक्षेप करती है, तो यह समुदाय के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। इस तरह का कदम देश के सभी नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनेगा। वहीं प्रदेश महासचिव मुफ्ती अब्दुल वहाब ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद का स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा है। इसके हजारों कार्यकर्ताओं ने फांसी के फंदे को हंसते-हंसते चूमा और देश के लिए कुर्बानियां दीं। आजादी के बाद भी यह संगठन देशहित और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने में सक्रिय रहा है।
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