भारत समाचार न्यूज एजेंसी
जयपुर, राजस्थान।
ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन के चेयरमैन एवं चीफ़ क़ाज़ी, हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी साहब ने “वंदे मातरम” को राष्ट्रगान के समकक्ष दर्जा देने के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है, जिसका सम्मान हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुस्लिम समाज दिल की गहराइयों से अपने वतन से मोहब्बत करता है और देश की एकता व अखंडता के लिए प्रतिबद्ध था, है और हमेशा रहेगा। हालांकि ‘वंदे मातरम’ के कुछ अंश ऐसे हैं, जिन पर धार्मिक आपत्तियां रही हैं। ऐसे में किसी भी नागरिक को उसके धार्मिक विश्वासों के विरुद्ध बाध्य करना उचित नहीं होगा।”
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने आगे कहा कि इस विषय पर संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय सम्मान और सभी समुदायों के संवैधानिक अधिकार, दोनों सुरक्षित रह सकें। उन्होंने सरकार से अपील की कि देश की विविधता और विभिन्न धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हुए ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे आपसी सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो सके।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने समाज के सभी वर्गों से भी शांति, संयम और जिम्मेदारी के साथ इस विषय पर विचार करने की अपील की।
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