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कई दिग्गजों को पछाड़कर ऐतिहासिक जीत दर्ज किया वंशीधर ब्रजवासी ने...

मुजफ्फरपुर/हाजीपुर (वैशाली) बिहार

बिहार विधान परिषद की तिरहुत स्नातक एमएलसी सीट पर दिलचस्प चुनाव परिणाम आया है।नीतीश,तेजस्वी,प्रशांत किशोर जैसे नेताओं के प्रत्याशियों को हरा कर एक निर्दलीय नेता वंशीधर ब्रजवासी ने जीत ली है।वंशीधर ने जदयू से यह सीट छीन ली है जो देवेश चंद्र ठाकुर ने सांसद बनने के बाद खाली की थी।उप चुनाव में जेडीयू का हाल ये हुआ कि उसके उम्मीदवार अभिषेक झा चौथे नंबर पर चले गए।वंशीधर ब्रजवासी का सबसे नजदीकी मुकाबला प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के डाॅक्टर विनायक गौतम के साथ रहा जो दूसरे नंबर पर आए।हालांकि तिरहुत स्नातक क्षेत्र उप चुनाव का रिजल्ट मंगल को आया लेकिन वंशीधर ब्रजवासी की जीत की खबर सोमवार को देर रात से ही सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।स्थानीय अधिकारी चुनाव आयोग ने मंगल को दोपहर में इसकी घोषणा कर दी कि वंशीधर ब्रजवासी की जीत हो चुकी है।इस सीट पर राजद के उम्मीदवार गोपी किशन तीसरे स्थान पर रहे।तिरहुत स्नातक सीट पर जीत हासिल कर एमएलसी बनने वाले वंशीधर ब्रजवासी की कहानी बेहद दिलचस्प है।जीत हासिल करने के बाद वंशीधर ब्रजवासी ने मीडिया से बात करते हुए सबसे पहले नीतीश सरकार को धन्यवाद कहा।ब्रजवासी ने कहा कि वे सरकार को इसलिए धन्यवाद देना चाहेंगे क्योंकि अगर सरकार ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त नहीं किया होता तो आज वे एमएलसी नहीं बनते।सरकार ने कार्रवाई की तभी शिक्षक गोलबंद हुए और उसका नतीजा सामने है।प्रखंड शिक्षक थे वंशीधर ब्रजवासी।अब वंशीधर ब्रजवासी का इतिहास जानिये।वे मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय रक्सा पूर्वी में प्रखंड शिक्षक के तौर पर कार्यरत थे।वे नियोजित शिक्षकों के संघ के अध्यक्ष थे और नियोजित शिक्षकों की मांगों के समर्थन में लगातार आंदोलन करते रहे हैं।मामला तब फंसा जब केके पाठक बिहार में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बन कर आये।केके पाठक ने शिक्षकों के किसी भी तरह आंदोलन पर रोक लगा दिया था और शिक्षकों के यूनियन को अवैध घोषित कर दिया था।सेवा से बर्खास्त कर दिये गए थे ब्रजवासी।केके पाठक के निर्देश पर भी प्रखंड शिक्षक वंशीधर ब्रजवासी के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।इसी साल 28 मार्च को मुजफ्फरपुर के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) ने मुजफ्फरपुर के मड़वन प्रखंड नियोजन इकाई को पत्र लिख कर वंशीधर ब्रजवासी के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।इसके बाद प्रखंड नियोजन इकाई ने ब्रजवासी को निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू की थी।हालांकि इसी दौरान केके पाठक बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पद से विदा हो गये थे लेकिन उनके कार्यकाल में वंशीधर ब्रजवासी के खिलाफ शुरू हुई विभागीय कार्रवाई जारी रही।आखिरकार वंशीधर ब्रजवासी को शिक्षक की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।मड़वन प्रखंड के बीडीओ ने 24 जुलाई को प्रखंड नियोजन इकाई की बैठक बुलाई और शिक्षक वंशीधर ब्रजवासी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था।शिक्षकों ने बनाया उम्मीदवार।इसी बीच तिरहुत स्नातक क्षेत्र में विधान परिषद की सीट पर उप चुनाव का ऐलान हो गया।दरअसल इस सीट से जेडीयू के देवेश चंद्र ठाकुर एमएलसी हुआ करते थे।लेकिन लोकसभा चुनाव में वे सांसद चुन लिये गये।इसके बाद उन्होंने एमएलसी की सदस्यता से इस्तीफा दिया और ये सीट खाली हो गयी।शिक्षकों के समर्थन से वंशीधर ब्रजवासी चुनाव मैदान में उतरे औऱ सारी पार्टियों को धूल चटाकर ऐतिहासिक जीत हासिल की और लगभग दो दशकों से जदयू के कब्जे वाली सीट को छीन लिया।यह जीत पर वंशीधर ब्रजवासी के लिए ये कहा जाए तो गलत न होगा।

मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है,वही होता है जो मंजूर ए खुदा होता है।

Karunakar Ram Tripathi
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