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सरकारी कार्यालय में भाड़े पर रखकर वाहनों के परिचालन में नियमों की उड़ रही है धज्जियां।

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार

इन दिनों सरकारी कार्यलियों केअधिकारियों के द्वारा वाहन भाड़े पर रखकर सरकारी कार्य के निपटाने हेतु इस्तेमाल किया जा रहे हैं,जिसमें परिवहन विभाग के नियमों का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है,चाहे वह भारत सरकार का हो या बिहार सरकार।

भारत सरकार एवं बिहार सरकार के विभिन्न स्थानीय कार्यालयों में भाड़े पर रखकर संचालित चार पहिये वाहनों पर प्राइवेट नम्बर प्लेट (बैक ग्राउंड सफेद एवं काला से नम्बर लिखा हुआ लगा हुआ है,साथ ही संबंधित विभाग द्वारा संबंधित पंजीकृत वाहन स्वामी को प्रति माह भाड़ा दिया जा रहा है,जबकि परिवहन नियमावली के तहत भाड़े पर परिचालन करने वाले गाड़ियों का नम्बर प्लेट पीला - काला रहता है।प्राइवेट एवं कमर्शियल रजिस्ट्रेशन का विभागीय शुल्क भी अलग-अलग होता है।ऐसे में प्राइवेट रजिस्ट्रेशन वाले चार पहिये वाहनों का सरकारी कार्यालय में भाड़े पर रखकर परिचालन किये जाने से जो सरकारी राजस्व की चोरी की जा रही है,उसके लिए कौन जिम्मेदार है,संबंधित विभाग (जिसमें प्राइवेट रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों का उपयोग किया जा रहा है,उसकेअधिकारी या परिवहन कार्यालय के अधिकारी या वाहन स्वामी ? इस मामले में भी शासन -प्रशासन के सक्षम पदाधिकारियों को परिवहन नियमावली के सुसंगत धाराओं केअंतर्गत कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय कोष को भरने का कार्य किये जाने की आवश्यकता है।

परिवहन एक्ट 2016 के अनुसार सजा का प्रावधान निम्न है।

परिवहन एक्ट 2016 के संशोधन के बाद भी प्राइवेट वाहनों का कमर्शियल इस्तेमाल पर जुर्माने के साथ-साथ सजा का भी प्रावधान है,कोई प्राइवेट रजिस्ट्रेशन पर वाहन का कमर्शियल इस्तेमाल करते पहली बार पकड़ा गया तो 2000 से ₹5000 तक का जुर्माना या तीन माह की सजा दोनों भी हो सकते हैं।

Karunakar Ram Tripathi
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