गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
दिल्ली से कुशीनगर तक सद्भावना साइकिल यात्रा पर निकले प्रसिद्ध गांधीवादी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता हिमांशु कुमार आज गोरखपुर पहुंचे। गोरखपुर के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं, लेखकों-संस्कृति कर्मियों ने उनका स्वागत किया। दोपहर में गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में उनसे संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश में पूंजीपतियों की मदद के लिए हमारी सरकार काम कर रही है। उसका एकमात्र काम देश के प्राकृतिक संसाधनों को पूंजीपतियों के हवाले करना है। इसका प्रतिरोध करने वालों पर सरकार जुल्म ढा रही है। आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधन की खुली लूट के बाद पूंजीवाद का अगला निशाना हमारी खेती है। अब वे हमारे कृषि संसाधनों पर कब्जा करने के लिए वह सब करेंगे जो उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में किया। इस खतरे के प्रति लोगों को सचेत होना होगा।
उन्होंने कहा कि आज सत्ता हमसे प्राकृतिक व कृषि संसाधनों को छीनने के साथ-साथ हमारे रोजगार, और बचत भी छीन रही है। आज सरकारी नौकरियां खत्म की जा रही हैं। उद्योगों में भी स्थायी रोजगार के बजाय ठेके पर काम दिया जा रहा है। बैंकों में जमा हमार पैसा उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है। इन मुद्दों पर हमारा ध्यान न जाए इसलिए नफरत की राजनीति की जा रही है और लोगों को आपस में बांटने व लड़ाने का काम किया जा रहा है। सरकार की इस साजिश को समझना होगा और इसके खिलाफ एकजुट होना होगा।
उन्होंने कहा कि साम्प्रदायिक ताकतें आज धर्म की इकहरी और संकीर्ण व्याख्या कर अपने देश के धर्म, विचार, दर्शन की बहुरंगी परम्परा पर हमला कर रही हैं। हमारे देश का आधार विविधता हैे और हमारी आजादी की लड़ाई इसी बुनियाद पर लड़ी गई थी।
हिमांशु कुमार ने विस्तार से छत्तीसगढ़ में दो दशक से अधिक समय तक अपने काम-काज के बारे में बताते हुए कहा कि जब उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा के लिए राज्य सत्ता द्वारा आदिवासियों के खिलाफ हिंसा, बेदखली का विरोध किया और लोगों को न्याय दिलाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया अपनायी तो उनका आश्रम ध्वस्त कर दिया गया। हिंसा के शिकार आदिवासियों को न्याय देने के बजाय उनकी जनहित याचिका को खारिज कर दिया गया और सुरक्षा बलों के कामकाज में रूकावट डालने के आरोप में उनके खिलाफ पांच लाख रूपए जुर्माना लगा दिया गया। हमने कहा कि संविधान हमें अन्याय का विरोध करने और इंसाफ के लिए लड़ने का अधिकाकर देता है। हमने अपने संवैधानिक अधिकार का पालन किया है इसलिए मैं जुर्माना नहीं दूंगा भले मुझे जेल जाना पड़े।
हिमांशु कुमार ने कहा कि गांधी सच के लिए साहस के साथ खड़े होने का नाम है। हम यही काम कर रहे हैं। अपनी यात्राओं के जरिए देश के असल सवालों पर लोगों से संवाद कर रहे हैं और नफरत की राजनीति के पीछे असली खेल को बेनकाब कर रहे हैं।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पितृसत्ता, जाति भेद, आर्थिक असमानता, अंधविश्वास, पाखंड के खिलाफ संघर्ष अतंतः एक साथ जुड़ेंगे और हम अपने सपनों का समाज बनाने में सफल होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि देवेन्द्र आर्य ने कहा कि हिमांशु कुमार अपनी सक्रियता से हमारे अंदर साहस भरते हैं। उनकी साइकिल यात्रा निश्चय ही देश की जनता को नई ऊर्जा देगी।
संचालन वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार सिंह ने किया। इस मौके पर विश्व विजय सिंह, आलोक शुक्ल, राजेश साहनी, अब्दुल्ला, डॉ रामनरेश, शालिनी श्रीनेत, सुनीता अबाबील, नितेन कुमार, अजय सिंह, प्रो असीम सत्यदेव, आनंद पांडेय, राजाराम चैधरी, शिवनंदन सहाय, फखरे आलम, अब्दुल्ला, राकेश सिंह, आरके सिंह, आलोक मल्ल सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।
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