नववर्ष जैसे माहौल में पुराने व नवप्रवेशी बच्चों का रोली तिलक हुआ भव्य स्वागत।
मेंहदावल, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश।
49 दिनों के बाद जब सभी परिषदीय विद्यालयों के दरवाज़े फिर खुल गया। शिक्षा के मंदिरों में सिर्फ खेल और उत्सव का माहौल देखने को मिला। गर्मी की छुट्टियों के बाद विद्यालय पर लौटे नौनिहालों का पूरा स्वागत फूलों, गुब्बारों, रोली-तिलक और मधुर संगीत के बीच बड़े आत्मीय और उत्साहजनक वातावरण में किया गया।
नौनिहालों का प्राथमिक विद्यालय कुसुम्हाँ पर ज्ञानचंद्र मिश्र ने स्वयं उपस्थित होकर बच्चों का स्वागत किया। उन्होंने पुराने व नवप्रवेशी बच्चों का रोली तिलक लगाकर अभिनंदन किया और उनके साथ खेलकूद, संगीत, हास्य-परिहास व कई सृजनात्मक गतिविधियों में भाग लेने हुए सभी बच्चों को प्रेरित किया व बच्चों को शिक्षा से जुड़ी नई जानकारियों से भी उन्हें अवगत कराया गया। विद्यालय का मुख्य द्वार रंग-बिरंगे गुब्बारों, फूलों और स्वागत-पटों से सजाया गया था। जिससे स्कूल परिसर एक उत्सव स्थल जैसा प्रतीत हो रहा था। छात्र-छात्राएं पारंपरिक अंदाज में स्वागत पाकर बेहद प्रसन्न नजर आए। अध्यापकों और अभिभावकों में भी इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। बीईओ ने बताया क्षेत्र के हर परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का स्वागत पारंपरिक रूप से रोली और तिलक से किया गया है। हमारा उद्देश्य बच्चों को स्कूल के प्रति आकर्षित करना और उन्हें शिक्षा के साथ-साथ खुशहाल वातावरण प्रदान करना है। इसके माध्यम से विद्यालयों ने यह संदेश दिया कि पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास का केन्द्र है—जहां हर दिन एक उत्सव हो सकता है। इस अवसर पर सरवरे आलम, ज्ञान प्रकाश, वलीउर्रह्मान सिद्दीकी, सुनीता देवी, सोनम, जयश्री समेत कई मौजूद रहें और आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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