रिपोर्ट विनोद विरोधी
गया, बिहार।
बिहार सरकार द्वारा राज्य के 208 प्रखण्ड में राजकीय डिग्री कॉलेज खोल कर एक जुलाई से पढ़ाई प्रारंभ किए जाने की घोषणा और कागजी खानापूर्ति पर बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने आक्रोश व्यक्त करते हुए शिक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की संज्ञा दी है। फैक्टनेब के अध्यक्ष डॉ शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा, महासचिव प्रो राजीव रंजन, सचिव डॉ रविन्द्र कुमार व प्रो श्रवण कुमार, मीडिया प्रभारी प्रो अरुण गौतम, कार्यालय सचिव प्रो सुशील झा , शिक्षक नेता डॉ शिव कुमार सिंह डॉ सुमन्त कुमार सिन्हा, डॉ मणिन्द्र कुमार , पूर्णिया विश्वविद्यालय संयोजक डॉ गोपाल कृष्ण यादव, ब.एन.मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा संयोजक प्रो अरविन्द कुमार राय, मगध विश्वविद्यालय अध्यक्ष डॉ विजय कुमार मिठू ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि बिहार सरकार द्वारा निर्धारित मानकों यथा पर्याप्त जमीन, भवन, पुस्तकालय, शिक्षार्थियों के बैठने का पर्याप्त साधन, शौचालय की समुचित व्यवस्था, खेल मैदान आदि के साथ ही शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों के अभाव में कहीं भी डिग्री महाविद्यालय खोलना सर्वथा अन्यायपूर्ण और शिक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है ।
फैक्टनेब नेताओं ने स्पष्ट किया कि राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्र छात्राओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए डिग्री महाविद्यालय की आवश्यकता अगर बिहार सरकार महसूस करतीं हैं और मंशा साफ है तो बिहार की राजधानी से लेकर जिला, अनुमंडल व प्रखंड स्तर पर स्थापित सभी तरह के संसाधनों से परिपूर्ण, यू.जी.सी. द्वारा निर्धारित योग्यता एवं कालेज सेवा आयोग व चयन समिति द्वारा अनुमोदित व सेवा संपुष्ट शिक्षकों की पूरी संख्या बल के बदौलत संचालित अनुदानित संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों को सरकारी दर्जा देकर बिना किसी विशेष अतिरिक्त आर्थिक बोझ के राज्य में डिग्री महाविद्यालय की आवश्यकता को बहुत हद तक पूरा किया जा सकता है।फैक्टनेब नेताओं ने मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अनुरोध किया है कि बिहार के शिक्षार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करें एवं अनुदानित संबद्ध डिग्री महाविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को परीक्षा परिणाम आधारित अनुदान राशि के बदले प्रतिमाह वेतन पेंशन भुगतान कर राज्य के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था कायम करने की दिशा में ईमानदार प्रयास करें।
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