विनोद विरोधी
गया, बिहार।
मगध विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा "कूटनीति: विकास और अभ्यास " विषय पर क्रियान्वित प्रमाणपत्र पाठयक्रम के तहत एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष व संकायाध्यक्ष प्रो0 प्रणव कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष व पाठ्यक्रम संयोजक डॉ अंजनी कुमार घोष द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक रूप से स्वागत सत्कार से हुई । प्रो अंजनी कुमार घोष द्वारा स्वागत भाषण की प्रस्तुति की गई । प्रो0 प्रणव कुमार ने अपने व्याख्यान की शुरुआत यह बतलाते हुए किया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था में राजनीति, शक्ति और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार को आकार कस प्रकार देती हैं,जबकि भू-अर्थशास्त्र इस बात पर ज़ोर देता है कि आधुनिक दौर में देश अपनी रणनीतिक और भू-राजनीतिक हितों को साधने के लिए व्यापार, निवेश, आपूर्ति-श्रृंखला और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे आर्थिक औज़ारों का उपयोग करते हैं। उन्होंने भारत की आर्थिक कूटनीति, विश्व व्यापार संगठन (WTO) में उसकी बदलती भूमिका तथा भारत एजेंडा प्राप्तकर्ता से एजेंडा निर्धारक के रूप में कैसे उभर रहा है।।साथ ही 1970-2022 तक के व्यापार-जी डी पी अनुपात के आलेखों पर भी प्रकाश डाला जो यह दर्शाता है कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी हुई है और आर्थिक निर्णय सीधे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं। क्रमशः कई पक्षों जैसे वाणिज्यवाद,ट्रिप्स, गैट आदि के महत्व को बतलाया गया। इसी क्रम में प्रो मो0 एहतेशाम खान, राजनीति विज्ञान विभाग, मगध विश्वविद्यालय द्वारा कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय जगत में व्यवहार में परिवर्तन को लोकतांत्रिक तरीके से लागू करना चाहिए। सर्टिफिकेट कोर्स की संचालक डॉ श्रद्धा ऋषि ने इस कोर्स की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जहाँ अन्य संस्थान इसी प्रकार के कोर्स के लिए बहुत ज्यादा शुल्क लेते हैं, मगध विश्वविद्यालय में यह कोर्स बहुत कम शुल्क मे उपलब्ध है। साथ ही इसमें पढाई की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है। इसमे BHU, DU, IDSA जैसे प्रख्यात संस्थाओं से विषय के विशेषज्ञों को बुलाया गया और ऑनलाइन लेक्चर्स करवाये गए। न केवल भारत बल्कि विदेश में स्थित प्रख्यात संस्थानों जैसे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर और यूरोपियन यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट (इटली) से भी विषय विशेषज्ञों को बुलाया गया है। मंच संचालन पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ श्रद्धा ऋषि द्वारा किया गया। सुश्री अर्चना कुमारी, शोध छात्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन की प्रस्तुति दी गई।
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