सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार, जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद में हुए 'बुजुर्गों के अकीदे' किताब पर ओपन बुक कॉम्पिटिशन के विजेताओं की घोषणा रविवार को की गई। जिसमें पहला स्थान सकीना बेगम, सना फातिमा, मुहम्मद रूशान, दूसरा स्थान मुहम्मद आसिफ अंसारी, शीरीन बानो, तजमीन इरशाद, मुहम्मद तहजीब, मुहम्मद हस्सान व तीसरा स्थान मुहम्मद जावेद, सानिया, शिफा खातून, अयान दानिश, जुबैदा खातून ने हासिल किया। सभी को दर्स-ए-कुरआन के दौरान सर्टिफिकेट व इनाम देकर सम्मानित किया गया।
सूरह कुरैश का दर्स देते हुए हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि सूरह कुरैश कुरआन-ए-पाक की 106वीं सूरह है। जो मक्का में नाजिल हुई। इसमें कुल चार आयतें हैं। यह उन प्रमुख सूरतों में से है जो इंसान को अल्लाह के नेमतों, हिफाजत और रोजी-रोटी की याद दिलाकर सुकून और बरकत प्रदान करती है। यह सूरह हमें कुरैश कबीले को मिली सुरक्षित यात्रा और व्यापार की याद दिलाती है। इसे पढ़ने से इंसान के अंदर अल्लाह द्वारा दी गई खुशहाली, रिज्क और अमन के प्रति शुक्रगुजारी का अहसास जागता है। रोजाना इस सूरह की तिलावत करने से मन को शांति मिलती है।
कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा सूरह कुरैश मक्का के शक्तिशाली कुरैश कबीले को अल्लाह की उन नेमतों की याद दिलाती है, जिसके कारण वे बिना किसी डर के व्यापारिक यात्राएं करते थे। मक्का रेगिस्तान में होने के बावजूद काबा की वजह से अल्लाह ने पूरे अरब में क़ुरैश को बहुत इज्जत और सुरक्षा दी थी। इस सूरह में अल्लाह उनसे कहता है कि जब तुम्हें इतनी सुख-सुविधा, भोजन और सुरक्षा मिली है, तो तुम्हें केवल इसी काबा के रब की इबादत करनी चाहिए। इस सूरह को नियमित पढ़ने से दिल का डर दूर होता है और सुरक्षा मिलती है। भूख और तंगी से बचने के लिए इस सूरह की तिलावत बहुत मुफीद है। सफर पर निकलने से पहले इसे पढ़ने से यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित रहती है।
अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। इस दौरान शीरीन आसिफ, आसिफ महमूद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, नेहाल अहमद सहित तमाम प्रतिभागी मौजूद रहे।
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