रिपोर्ट :विनोद विरोधी
गया, बिहार।
जिले के गुरुआ में भाजपा नेता अमित दांगी द्वारा पत्रकार अमित यादव के साथ कथित रूप से की गई मारपीट और दुर्व्यवहार की घटना बेहद निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि किसी खबर को लेकर आपत्ति थी, तो उसका विरोध संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए था। लेकिन जिस तरह से पत्रकार को दुकान से जबरन उठाकर बंधक बनाए जाने और मारपीट किए जाने की बात सामने आई है, वह कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। और भी चिंताजनक बात यह है कि अब पीड़ित पत्रकार के खिलाफ ही झूठा एससी/एसटी मामला दर्ज कराने के लिए थाने में आवेदन दिए जाने की चर्चा है। यह पूरी घटना अत्यंत गंभीर है और इसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है।पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, अभद्रता या दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती। दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। संगठन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लगातार अपनी निगरानी बनाए हुए है और हर हाल में न्याय दिलाने की दिशा में प्रयासरत है।
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