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मुस्लिम समुदाय का बकरीद का महान पर्व हर्षउल्लास के साथ हुआ संपन्न।

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार।

पूरे विश्व में मनाए जाने वाला मुस्लिम समुदाय का महान पर्व,ईदउलअजहा(बकरीद) ईदगाहों,मस्जिदों में नमाज अदा करने के बाद शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोग अपने-अपने घरों को लौटकर 

जानवरों की कुर्बानी की रस्म कोअदा किया।इसअवसर पर सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों नेअपने पास पड़ोस, इष्ट मित्र,सगे संबंधियों को स्वादिष्ट भोजन कराकर इस पर्व की खुशी को चार चांद लगा दिया। यह पर्व त्याग, बलिदान,सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी प्रेम,स्नेह को कायम रखने के लिए मनाया जाता है

यह महान पर्व ईदुलअजहा

10 वीं जिल्हजा को मनाया जाता है,इस इस वर्ष यह पर्व 28,29,और 30 मई को मनाया जा रहा है।पूरे विश्व के मुस्लिम समुदाय के लोग नमाजअदा करने के बाद कुर्बानी का रसमअदा करते हैं,यह दोनों रस्म एक दूसरे से पारस्परिक संबंध से जुड़े हुए हैं।ईदुलअजहा(बकरीद) इस्लाम धर्म का एक प्रमुख पवित्र त्यौहार है।यह रिवायत हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम,उनके बेटे हजरत ईस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानियों को याद दिलाती है।अरबी महीने के दसवीं जिलहजजा को पूरे विश्व के सारे मुस्लिम ईदुलअजहा की नमाज पूरे धार्मिक उत्साह,इस्लाम धर्म के बताए हुए गतिविधियों को सामने रखते हुएअदा करते हैं,इसके बाद जानवरों की कुर्बानी करकेअपने फर्ज कोअदा करते हैं।यह पर्व पैगंबर इब्राहिमअलैहिस्सलाम काअल्लाह के रास्ते मेंअपने बेटे का कुर्बानी देने का ऐतिहासिक घटना को याद दिलाता है। इसका इस्लामीक पृष्ठभूमि यह है कि अल्लाह ने इब्राहिमअलैहिस्सलाम का परीक्षा लेने के लिए ख्वाब में दिखाया था किआपअपने सबसे प्रियऔर बहुमूल्य को

कुर्बानी देने को कहा गया था 

उन्होंने इसको गंभीरता से लेते हुए सोचफिक्र में डूब गए किअल्लाह के रास्ते में सबसे प्रिय,मनपसंद,भरोसेमंद पुत्र से बड़ा कोई नहीं हो सकता, इसलिए इन्होंनेअल्लाह की रजा के लिए,उनकी हुकुम का तमिल करते हुए,अपने पुत्र,ईस्माइलअलैहिस्सलाम को कुर्बानी करने की ठान ली उन्होंनेअपने बेटे ईस्माइल अलैहिस्सलाम को इस बात की जानकारी दी किअल्लाह के रास्ते मेंअल्लाह के हुक्म के मुताबिकअपने बेटे की कुर्बानी करनी है,इस बात को सुनते ही उनके इकलौते बेटे इस्माइलअलैहिस्सलाम ने अपनी रजामंदी जाहिर कर दी,कहा कि जबअल्लाह का हुक्म है तोआप बिना सोचे समझे हमें कुर्बानी कर ही दें ताकि अल्लाह का हुक्म पूरा हो जाए,साथ हीआपकी ख्वाब की ताबीर हो सके।

कुर्बानी करने के लिए जानवर को स्वस्थ,एक वर्ष का होना,दाँता होना,किसी बीमारी से ग्रस्त नहीं होना बताया गया है,अगर इन शर्तों में से कोई भी एक शर्त छूट जाएगा तो उस जानवर की कुर्बानी जायज नहीं होगी, कुर्बानी ही नहीं होगी।कुर्बानी का यह पर्व हमें निस्वार्थ सेवा करना,त्याग,बलिदान,गरीब,मजबूर,मिस्कीन,जरूरतमंद,असहाय लोगों की सहायता करना सीखाता है।इसी महीने में हज का रस्म भीअदा किया जाता है,पूरे विश्व से लोग हज करने के लिए मक्का और मदीना जाते हैं,वहांअनेकों प्रकार काअरकान कोअदा करते हैं,कुर्बानी और हज का रस्मअदा करने के बाद अपने अपने घरों को लौट जाते हैं।

इस अवसर पर जिला प्रशासन,पुलिस प्रशासन की चौकसी,सभी चौक चौराहों, संवेदनशील स्थानों पर,पूजा स्थलों पर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई थी,साथ ही पुलिस का गस्ती दल,डायल 112 का पुलिस जीप लगातार चक्कर लगा रहा था,इसकेअलावा सैकड़ो की संख्या में सीआरपीएफ के जवान, बीएसएफ के जवान,बिहार पुलिस के जवान गशती कर रहे थे।जिला पदाधिकारी, जिला पुलिस कप्तान, चंपारण क्षेत्र के डीआईजी,

भी लगातार गस्ती कर रहे थे।

पूरे शहरी क्षेत्र में फ्लैग मार्च निकाला गया।पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था देखकर लोगों के होश उड़ गए,किसी भीअप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासनअलर्ट मूड में था।शहर के गणमान्य व्यक्ति,शिक्षाविद,सामाजिक कार्यकर्ता,मानवअधिकार कार्यकर्ता,जनप्रतिनिधि, राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता सभी माहौल को शांत बनाए रखने के लिए जागृत थे।जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन भी सभी असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखी हुई थी।शहर के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने संवाददाता को बताया कि पुलिस प्रशासन की चौकसी से समाज में पनप रहे असामाजिक तत्व का कोई दाल नहीं गला,सभी पुलिस की व्यवस्था को देखकर घर में दुबक गए।संवाददाता ने भी पूरे शहर का भ्रमण करके शांति बहाल कर रहे लोगों का मिजाज टटोला,भ्रमण के दौरान कहीं से भी कोई अशांति नजर नहींआई।

समाचार लिखे जाने तक किसी तरह का कोई अप्रिय घटना की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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