हफ़ीज अहमद खान
कानपुर, मनोकोजी शिंदें की पुत्री अहिल्या बाई होल्कर की जयंती पर राम कुमार एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट आफ इण्डिया पूर्व विधायक
राष्ट्रीय अध्यक्ष-अखिल भारतीय लोधी निषाद बिन्द कश्यप एकता समता महासभा राष्ट्रीय महासचिव-नेशनल एसोसियेशन आफ फिशरमेन ने बताया कि औरगंजेब की मृत्यु के बाद मुगलों के पतन के समय मराठा अपने साम्राज्य का विस्तार करने में व्यस्थ थे। मराठा सेनापति मल्हार राव होल्कर को पेशवाब राव ने मालवा की जागीर सौंप दी। मल्हार राव होल्कर ने अपने बाहुबल से राज्य की स्थापना की और यहीं इंदौर बसाया।खडेंराव होल्कर पुत्र मल्हार राव होल्कर के लिए सर्वगुण सम्पन्न पत्नी की तलाश कर रहे थे जो उनके बेटे की राजगद्दी संभालने में मदद कर सके। उनके भ्रमण के समय चुनड़ी गाँव से गुजर रहे थे तभी शाम की आरती के समय एक लड़की के भजन ने उनका ध्यान खींचा वे अहिल्या के गुणों और मूल्यों से प्रभावित होकर अपने बेटे खडेराव से करा दिया। विवाह के बाद खडेंराव अचानक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गये। बेटे के साथ राज्य का पतन न हो जाय इसके लिए उन्होनें खुद ही प्रशासन संभालना शुरू कर दिया, हलांकि चूँकि कोई पुरूष राजा नही था, इसलिए राज्य के राज्य के एक कर्मचारी ने दूसरे राज्य के राजा राघोवा को पत्र लिखा, जिसमें उन्हे होल्कर को पकड़ने के लिए आमंत्रित किया गया। राजगद्दी संभालते समय रानी अहिल्या बाई होल्कर ने यह सूचना आस पास के राज्यों को दी।
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