तुर्कमानपुर व जाफरा बाजार में दर्स-ए-कुरआन की शुरूआत
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
तुर्कमानपुर न्यू कॉलोनी व सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में दर्स-ए-कुरआन (व्याख्यान) की शुरूआत हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। नात-ए-पाक पेश की गई। अल्लाह के नाम (बिस्मिल्लाह) की फजीलत बताई गई।
दर्स-ए-कुरआन देते हुए मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि 'बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम" का अर्थ है "अल्लाह के नाम से शुरू, जो बहुत मेहरबान और रहम करने वाला है"। इस्लाम में हर अच्छे काम की शुरुआत बिस्मिल्लाह से करना सुन्नत है और इसकी बहुत बड़ी फजीलत और बरकत है। जो भी जायज काम बिस्मिल्लाह के बिना शुरू किया जाता है, वह अधूरा और बरकत से खाली रहता है। बिस्मिल्लाह पढ़ने से काम में अल्लाह की मदद और खैर-ओ-बरकत शामिल हो जाती है। खाना खाने, घर में दाखिल होने या दरवाजा बंद करते समय बिस्मिल्लाह पढ़ने से शैतान उन चीजों में शरीक नहीं हो पाता। यह इंसान के लिए एक रूहानी ढाल का काम करता है। मुश्किल वक्त में बिस्मिल्लाह का जिक्र दिल को सुकून देता है और हिफाजत का जरिया बनता है। उलमा किराम इसे बीमारियों और परेशानियों से शिफा के लिए भी पढ़ने की सलाह देते हैं। बिस्मिल्लाह अल्लाह के नाम से शुरू होने वाली एक ऐसी इबादत है जो बंदे को अल्लाह के करीब लाती है और उसकी रहमत के दरवाजे खोलती है। खाना, पीना, कपड़े पहनना, वजू, पढ़ना और यात्रा करना, लगभग हर जायज कार्य के शुरू में इसे पढ़ना सुन्नत और लाभदायक है। जो महत्वपूर्ण काम अल्लाह के नाम से शुरू नहीं किया जाता, वह अधूरा (बे-बरकत) रह जाता है। बिस्मिल्लाह जीवन में सुरक्षा, शांति और आध्यात्मिक समृद्धि का जरिया है।
मस्जिद के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ की। दर्स में मुहम्मद इस्माइल, रौशन अली, मुजफ्फर हसनैन रूमी, नेहाल अहमद, जावेद, आसिफ महमूद, सफियान, अब्दुस्समद, मुहम्मद शाद, रहमत अली, उबैद रजा, आसिफ, मुहम्मद आजम सहित तमाम लोग शामिल हुए।
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