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बेतिया के ऐतिहासिक,प्राचीन, बदहाल मीनाबाजार के इतिहास की झलकियां पर खास नजर।

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार।

 बेतिया शहर मेंअवस्थित ऐतिहासिक,प्राचीन,आज का बदहाल मीनाबाजार का ऐतिहासिक झलकियां पर खास नजर डालते हुए संवाददाता नेआम लोगों की जानकारी के लिए इस संबंध में इस मीनाबाजार की शुरुआती दौर से आज तक की बदहाल स्थिति पर नजर दौडाई है।बेतिया का ऐतिहासिक मीनाबाजार वर्ष 1911से बनना शुरू हुआ था,इस बाजार की विशेषता यह थी कि इस बाजार में सुई से लेकर सोना तक मिल जाता था,यहां के लोगों के परिवार के किसी भीऔसर पर चाहे वह शादी हो या लोगों के परिवार में मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के सामानों की भीआवश्यकता पूरी हो जाती थी,इसी कॉन्सेप्ट केआधार पर इस मीनाबाजार की यहां पर आधारशिला रखी गई,ताकि आम जनता बाजार के इस कोने से लेकर उस कोने तक मेंअपनी सारी जरूरी सामान खरीद करअपने घर को जा सके।अंग्रेजों के जमाने में बेतिया राज के द्वारा निर्माण कार्य कराया गया,यह बाजार आजआउटडेटेड और जर्जर स्थिति में पहुंच गया है।इस ऐतिहासिक मीनाबाजार की स्थिति की जानकारी हासिल करने के लिए संवाददाता ने मीनाबाजार के ही एक वृद्ध, बेयवसाई,मोहम्मद नसीम बरमक्की ने संवाददाता को बताया कि वर्ष 1911 में मीना बाजार बनना शुरू हुआ था, जो 1917 में बनकर तैयार हुआ,इसके बाद लोगों को दुकान इसमें दी जाने लगी, उस समय कोई वहां पर दुकान लेना नहीं चाहता था,ऐसे में बेतियाराज द्वारा शुरुआती 5 साल तक फ्री में दुकान चलाने को लेकर लोगों को इस तरफ आकर्षित किया गया,जिसके बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के कई लोगों ने इसमें दुकान ली, वहआगे बताते हैं कि शुरुआती भाड़ा सारे दुकान का इसमें एकआना था,इसके बाद समय-समय पर उसमें बढ़ोतरी होते हुए चार आना,आठ आना,1 रुपया हुआ,इसके बाद बढ़ोतरी होते हुए फिलहाल बढ़कर ₹17 से ₹25 तक पहुंच चुका है। इस संदर्भ में स्थानीय लोगों ने इस पर नाराजगी जताते हुए संवाददाता को बताया कि जितनी भी दुकान हैं,उसका किराया कम से कम इस महंगी के दौर में ₹ 3000/= होनी चाहिए,मगर ऐसा नहीं होने से आज इसकी स्थिति जर्जर हो चुकी है,बहुत सारे लोग जबरदस्ती कब्जा करके, अवैध रूप से मकान,दुकान का निर्माण करा लिए हैं,मगर किराया के मदद में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस ऐतिहासिक मीनाबाजार में अलग-अलग सामानों के मिलने के लिएअलग-अलग गली में दुकानों को खोला गया,जिससेआम जनता को सुई से लेकर सोना तक सारा सामान एक ही मीनाबाजार में मिल सके।इस मिनाबाजार के विशेष खासियत यह है कि इस बाजार में विवाह से लेकर अंत्येष्टि तक का सामान मिलते हैं,मीनाबाजार में चावल के लिए चावलहटा,गेहूं पट्टी,लोहे के समान के लिए लोहारहटा, सब्जी के लिए सब्जीहटा, कपड़ा मार्केट,किराना मार्केट, सोना के लिए सोनरपट्टी, मछलीहट्टा,मटनपट्टी,दवा दुकान,जनरल स्टोर,विभिन्न प्रकार के बर्तन की दुकान जैसे विभिन्न गलियों में खुले हुए है, इसमें हरआवश्यक सामान के लिएअलग-अलगअनेकों गलीयों इसमें मौजूद हैं,जहां सारी जरूरी सामान मिल जाती हैं,इसी खास विशेषता के कारण बेतिया शहर का यह एक ऐतिहासिक,प्राचीन,मीना बाजार आज पूरे भारत में अपना एक अस्तित्व रखता है।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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