पत्रकारिता का उद्देश्य जनकल्याण - कुलपति
रिपोर्ट - धनंजय शर्मा
बलिया lजननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के तत्वावधान में दीनदयाल उपाध्याय का पत्रकारिता में योगदान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य जन-कल्याण है। दीनदयाल जी का एकात्म मानव दर्शन पूँजीवाद और साम्यवाद जैसे विरोधी दर्शनों में बँटे विश्व के कल्याण का पथ सुझाता है। व्यष्टि और समष्टि समेकित हैं और एक दूसरे को प्रभावित करते हैं, दीनदयाल जी का यह विचार पश्चिमी उपभोगवादी दर्शन का प्रतिकार और समावेशी विकास का आधार प्रस्तुत करता है। मुख्य वक्ता प्रो. ओमप्रकाश सिंह, पूर्व निदेशक, पत्रकारिता संस्थान, काशी विद्यापीठ, वाराणसी ने कहा कि दीनदयाल जी पत्रकारिता में शुचिता के समर्थक थे। उनका विचार था कि पत्रकारिता का कार्य सूचना देना, दृष्टि प्रदान करना, आवश्यक हो तो विरोध करना है। पत्रकारिता लोक का मुख है, भविष्य की वाणी है। दीनदयाल जी ने अपनी पत्रकारिता में सर्वदा इस आदर्श का निर्वहन किया। उन्होंने राष्ट्र प्रथम का विचार प्रस्तुत किया। विशिष्ट वक्ता प्रो. गोविंद पाण्डेय, अध्यक्ष, पत्रकारिता विभाग, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विवि, लखनऊ ने कहा कि दीनदयाल जी पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति की फिक्र करते हैं, जिस पर दृष्टि नहीं जाती। पत्रकारिता लोकहित में बहने वाली नदी है। पत्रकारिता लोक एवं नीति निर्धारकों के मध्य संवाद सेतु का कार्य करती है। दीनदयाल जी ने अपनी पत्रकारिता से इसी उद्देश्य को साधने का यत्न किया। कार्यक्रम का संचालन अनुराग, विषय प्रवर्तन डाॅ. रामसरन यादव, स्वागत डाॅ. अनुराधा राय एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. अभिषेक मिश्र ने दिया। इस अवसर पर डाॅ. पुष्पा मिश्रा, निदेशक, शैक्षणिक, परिसर के प्राध्यापक गण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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