एक साल पूर्व विधायिका ज्योति मांझी ने किया था मुआयना
रिपोर्ट:विनोद विरोधी
गया।सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र की विधायिका ज्योति मांझी विकास का चाहे जितना ढिंढोरा पीट लें, गांव का पक्की सड़क से जोड़ने का दम्भ भर लें; लेकिन हकीकत है कि बाराचट्टी प्रखंड के दहियार गांव के ग्रामीण आज भी महज एक कि.मी.सड़क के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।जीटी रोड शोभ (गुलसकरी नदी) से सुरौंधा गांव तक जाने वाली सड़क में तेतरिया से दहियार तक जाने वाले कच्ची सड़क की दुर्दशा इतनी बदतर है कि इस बरसात के मौसम में लोगों को बाहर निकलना दुभर हो गया है।इस सड़क की लंबाई महज एक किलोमीटर है, जिसमें कीचड़ों का अंबार लगा है। बीते वर्ष स्थानीय विधायिका ज्योति मांझी ने इस सड़क की दुर्दशा का मुआयना भी की थी और लोगों को शीघ्र ही निर्माण का वायदा की थी, लेकिन विडम्बना है कि सड़क की निर्माण के प्रति कोई खास रुचि नहीं दिखा पाई। आश्चर्य तो इस बात से भी है कि इस सड़क की सुध न तो स्थानीय मुखिया ने ली है और ना ही जिला परिषद सदस्य ने ;जबकि तमाम जनप्रतिनिधियों को यहां के ग्रामीणों ने खुलकर मदद की है। बावजूद उनकी उदासीनता सवालिया निशान खड़ा करता है। बता दें कि बीते साल जब विधायिका मुआयना करने पहुंची थी तो उनके साथ पथ निर्माण विभाग के कई वरीय अभियंता भी मौजूद थे। इस बाबत आज जब विधायिका ज्योति मांझी से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो वह मोबाइल नहीं उठा सके।गौरतलब है कि बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र में ऐसे अनेक सड़क व पुल पुलिया है जो अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं और जनप्रतिनिधि चैन की बंसी बजा रहे हैं।विदित यह भी हो कि विधायिका ज्योति मांझी केंद्रीय मंत्री व हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के सुप्रीमो जीतनराम मांझी की समधिन है।
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