अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को लेकर आए फैसले पर विरोध हुआ तेज
वसीम अकरम कुरैशी
जयपुर, राजस्थान
आरक्षण अधिकार मंच राजस्थान की प्रदेश कार्याकारिणी की बैठक प्रदेश अध्यक्ष राजाराम मील की अध्यक्षता में समपन्न हुई। जिसमें उच्चत्तम न्यायालय द्वारा 1 अगस्त 2024 के निर्णय में अनुसूचित जाति, जनजाति समाज के विरूद्ध आए फैसले को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में प्रमुद्धजनों ने इस फैसले को संविधान सम्मत नही बताया। वे बोले- सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जातियों में आपस में वर्ग-भेद होगा तथा इससे समाज विखंडित होगा और ऐसा करना राष्ट्रहित में उचित नही है।
आरक्षण अधिकार मंच के अध्यक्ष राजा राम मील ने कहा कि राज्य सरकारें अपने राजनैतिक लाभ के लिए जातियों, उपजातियों को अपने पक्ष में करके वैमन्यस्यता फैलाने का काम करेगी। संविधान की धारा 341 व 342 में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति को एक सजातीय (होमोजिनियस) वर्ग के रूप में मान्यता दी गई है और इसमें किसी भी प्रकार का जोड़ने व घटाने का अधिकार संविधान ने राष्ट्रपति व संसद को प्रदत्त किया है, जबकि उच्चत्तम न्यायालय ने यह अधिकार राज्य सरकारों को देकर असंवैधानिक निर्णय पारित किया है। वे बोले-आरक्षण अधिकार मंच राजस्थान इस निर्णय का विरोध करता है और देश में जातिय जनगणना की भी पूरजोर मांग करता है तथा अल्पसंख्यक वर्ग के प्रतिनिधियों की तरफ से रखे गए प्रस्ताव के आधार पर, वक्फ बोर्ड अधिनियम में प्रस्तावित संसोधन का भी विरोध करता है।
मंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामेश्वर लाल सेवार्थी के अनुसार बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। जिसमें कहा गया कि
21 अगस्त 2024 को अनुसूचित जाति तथा जनजाति के संगठनों द्वारा प्रस्तावित भारत बंद का आरक्षण अधिकार मंच राजस्थान सर्वसम्मति से समर्थन करने का निर्णय पारित करता है और राष्ट्रहित में अपील करता है कि सभी व्यापारी वर्ग सहयोग करे और सोहार्द्धपूर्ण वातावरण में बंद का समर्थन करे तथा अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
सुरूर अहमद ने भी किया बंद का समर्थन
इस बीच वरिष्ठ समाज सेवी सुरूर अहमद ने एक मीटिंग के दौरान आरक्षण अधिकार मंच के प्रस्ताव का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने भारत बंद को सफल बनाने के लिए सभी व्यापारियों से अपने प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की। सुरूर अहमद ने कहा कि सियासी दल अपनी राजनीति करते हैं और वे जाति, धर्म, वर्ग के आधार पर लोगों को आपस में लड़ाने एवं मतभेद पैदा करने का काम करते हैं, जिसे जन सामान्य को समझना होगा तथा मिलजुल कर और इस देश की गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाते हुए सद्भाव पूर्ण माहौल में प्रगाढता लाना होगा।
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