सेराज अहमद कुरैशी
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
टैक्स बार एसोसिएशन गोरखपुर के अधिवक्ताओं ने जीएसटी अपीलीय मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप के द्वारा करदाताओं का शोषण करने के विरोध में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया है और इस परिपेक्ष में उत्तर प्रदेश के समस्त कर अधिवक्ता आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं, जिसका कारण यह है कि प्रदेश के मुख्य सचिव ने न्यायिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर जिस तरह अपीलीय न्यायालय पर दबाव बनाया है उसके दुष्परिणाम स्वरुप बिना सुनवाई का मौका दिए आदेश जारी किए जा रहे हैं, और इस तरह आधिकारिक वसूली करने के उद्देश्य से करदाताओं का शोषण करने का कुचक्र किया जा रहा है, वर्षों से पड़े पेंडिंग मामलों का निर्धारण 30 सितंबर 2024 तक करने का मुख्य सचिव का एक तरफा आदेश तानाशाही मानसिकता का परिचालक है और न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप भी, इसी एक तरफा आदेश का अधिवक्ताओं द्वारा प्रदेश स्तर पर विरोध करने का निर्णय किया गया है, और प्रदेश संघ का अगला आदेश आने तक गोरखपुर के दोनों अपीलीय अधिकारियों के न्यायालय का कार्य बहिष्कार और आंदोलन दिनांक 7 सितंबर 24 से आगामी सूचना तक जारी रहेगा।
हमारे प्रांतीय संघ की मांग है कि
1. अपीलों का निस्तारण अधिनियम के अंतर्गत किया जाए न कि अपर प्रमुख सचिव के निर्देशों के अनुसार ।
2.अपील की नोटिस को फर्म के स्वामी साझेदारी एवं डायरेक्टर पर तमिल कराई जाए। 3. राज्य कर विभाग में न्यायिक प्रक्रिया में शासन एवं प्रशासन का हस्तक्षेप प्रतिबंधित हो। 4. विभागीय अपील में विभाग प्रथम पक्षकार बनाम फर्म द्वितीय पक्षकार अपील से लेकर उच्चतम न्यायालय तक होता है इसलिए विभाग का हस्तक्षेप विधि संगत नहीं है।
ज्ञापन देने हेतु एडवोकेट बी.पी बरनवाल,एडवोकेट नासिर, एडवोकेट सुभाष शुक्ला, एडवोकेट सत्येंद्र मिश्रा, एडवोकेट खालिद , एडवोकेट विनय शंकर श्रीवास्तव आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
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