शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार
राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर,विभिन्न संगठनों के द्वारा,जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों,बुद्धिजीवियों एवं छात्र छात्राओं ने भाग लिया ।
इस अवसर पर पूरा राष्ट्र राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है।भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष भारत की महान स्वतंत्रता सेनानी कोकिला सरोजिनी नायडू के सम्मान में एवं भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकीअतुल्य योगदान को देखते हुए प्रत्येक वर्ष 13 फरवरी उनके जन्म दिवस के अवसर पर भारत सरकार एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर वक्ताओं ने बाल विवाह उन्मूलन एवं घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिए समाज में नई जागृति लाने की अपील की।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सरोजिनी नायडू भारत की प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी व कवयित्री थी,उन्हें भारत कोकिला यानी नाइटिंगेलऑफ इंडिया भी कहा जाता है।वह आजाद भारत की पहली महिला राज्यपाल भी रही हैं। ब्रिटिश सरकार के खिलाफ देश को आजादी दिलाने के लिए हुए स्वतंत्रताआंदोलन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय महिला दिवस सरोजिनी नायडू कोसमर्पित है।सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ।वह बचपन से बुद्धिमान थीं। देश कीआजादी,महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।आजादी के बाद सरोजिनी नायडू को पहली महिला राज्यपाल बनने का भी मौका मिला। उनके कार्यों और महिलाओं के अधिकारों के लिए उनकी भूमिका को देखते हुए सरोजिनी नायडू के जन्मदिन के मौके पर राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। वह महिला सरोजिनी नायडू थी। भारत सरकार ने 2014 में सरोजिनी नायडू की जयंती को राष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाने की शुरुआत की। साहित्यिक योगदान पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।सरोजिनी नायडू को भारत कोकिला कहा जाता था।
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