रिपोर्ट विनोद विरोधी
गया, बिहार
गया बिहार सरकार के वित्त मंत्री सम्राट चौधरी द्वारा पेश किए गए आम बजट 2025-26 में राज्य के अनुदानित डिग्री, इन्टर, +2 विद्यालय, उच्च विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वर्षों पुरानी वेतनमान देने की मांग पूरी नहीं होने से इन संस्थानों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों में भारी मायूसी है।
बिहार प्रदेश कॉंग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता प्रो विजय कुमार मिट्ठू, प्रो अरुण कुमार प्रसाद , डॉ मदन कुमार सिन्हा प्रो अनिल कुमार सिन्हा, आदि ने कहा कि कॉंग्रेस पार्टी सहित राज्य के सभी विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों, नेताओ, कार्यकर्ताओं के साथ-साथ बिहार राज्य अनुदानित शिक्षण संस्थान शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ द्वारा लगातार मांग के वाबजूद भी इस बजट में उम्मीद के विपरित अनुदान की जगह नियमित वेतनमान देने की घोषणा नहीं कर नीतीश सरकार ने हज़ारों कर्मचारियों के उम्मीद पर पानी फेरने का काम किया है।
नेताओ ने कहा कि एक ओर राज्य सरकार सूबे के हर प्रखंडों में डिग्री, इन्टर की पढ़ाई सुनिश्चित करने की बातें दिन रात करते नहीं थकती, तो दूसरी ओर अभी राज्य में अंगीभूत एवं संबंधन प्राप्त डिग्री कॉलेज की संख्या 300 के अंदर है, जबकि राज्य में 524 प्रखंड है।
नेताओ ने कहा कि राज्य में 2008 से संबंधन प्राप्त डिग्री, इन्टर, +2 विद्यालय, उच्च विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय के छात्रों का रिजल्ट के आधार पर एक लिमिट बनाते हुए लेटलतीफ अनुदान देने का काम कर रही है, जो अभी 2017 तक ही मिला है तथा आठ वर्षों का बकाया है।
नेताओ ने कहा कि बिहार से अलग हुए झारखण्ड राज्य में सभी अनुदानित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को अनुदान के जगह नियमित वेतनमान मिलना शुरू हो गया है।
नेताओ ने कहा कि राज्य के सभी अनुदानित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का अब एक ही नारा है"अनुदान नहीं वेतनमान चाहिए"की आवाज को आगे भी बुलंद करते हुए मांग जारी रहेगा जब तक वेतनमान देने की घोषणा राज्य सरकार कर नहीं देती।
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