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शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार, महंगाई पर निरंतरण हेतु जनसुराज से जुड़ें:-- प्रशांत किशोर

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार

जनसूराज के संस्थापक, अग्रणीय नेता,प्रशांत किशोर ने लोरिया के साहूजैन स्टेडियम में एक महती सभा को संबोधित करते हुए,साथ में तंज कसते हुए कहा कि आप सभी ने तो अपना वोट महज 5 किलोअनाज,मंदिर बिजली,सड़क के नाम पर वोट देकर मोदी व नीतीश को गद्दी सौंप दी,मगरआपने कभी इससे ऊपर उठकर,पढ़ाई, रोजगार,महंगाई पर निरंतरण के नाम पर वोट तो नहीं किया तो फिरआप औरआपके बच्चे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के लिए दर दर भटकेंगे ही।प्रशांत किशोर ने मंच से घोषणा की कि यह सभी विपक्षी पार्टियों के लिए,दुर्गा पूजा,दिवाली,छठ होगी।

महती सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने मंदिर, मस्जिद,धर्म,मजहब,जाति के नाम पर अपना वोट देतीआ रही है,किसी मतदाता नेअपने बच्चों के पढ़ाई,रोजगार, मंहगाई,स्वास्थ्य के नाम पर वोट नहीं दिया,यदि आप अपना वोट मोदी-नीतीश, लालटेन,कांग्रेस,प्रशांत को न देकर जनसुराज को देते हैं तो निश्चित रूप सेआपके बच्चों की पढ़ाई,स्वास्थ्य की सुविधा, रोजगार भी मिलेगा।उपस्थित लोगों से संबोधित करते हुए जनसूराज के संस्थापक, प्रशांत किशोर ने कहा कि जनसुराज के सरकार बनते ही सबसे पहले वृद्धा पेंशन को ₹2000 प्रति माह,सभी किसानों को उनकेअपने खेतों में काम करने पर उन्हें मनरेगा से पैसा दिया जाएगा,यह भी एक रोजगार का तोहफा है, उन्होंने कहा किअब गरीबों के बच्चे भी प्राइवेट स्कूल में अंग्रेजी मीडियम में पढ़ने जाएंगे,उसका सारा खर्च सरकार उठाएगी,उन्होंने नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि नीतीश भरोसे वाले व्यक्ति नहीं है,वह कुर्सी पाने के लिए कभी कमल पर, तो कभी लालटेन पर बैठ जाते हैं।वहीं अन्य वक्ताओं में जनसुराज के विधान पार्षद, आफाकअहमद,पूर्व मंत्री, पूर्णमासीराम,पूर्व एमएलसी, चंद्रबली यादव,पूर्व आईएएस, एन के मंडल,पूर्वआईपीएस, आनंद मिश्रा,सचिंद्र पांडे उर्फ गुड्डू पांडे,शमशादअली,राजू पांडेआदि ने सभा को संबोधित किया।

मगर दुख की बात यह रही कि सभा में महिलाओं के द्वारा हंगामा खड़ा किया गया, महिलाएं सभा का बहिष्कार करने लगी,उनका आरोप था कि सभी नेता मंच पर साए में बैठे हुए हैं,हम कार्यकर्ता इस धूप में खड़े हुए हैं,महिला कार्यकर्ताओं को बैठने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया था।प्रशांत किशोर के द्वारा संबोधित करने के क्रम में सभा में खलबली मच गई, कई नेताओं ने महिलाओं को समझा बूझकर उनको बैठने के लिए कुर्सी का प्रबंध किया गया,तब जाकर मामला कुछ शांत हुआ,इसके बाद से ही कार्यक्रम अपने अंत तक चला।

Karunakar Ram Tripathi
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