अब्दुल नईम कुरैशी
लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
राहुल गांधी ने इस दौर में जो जमीनी मेहनत और राजनीतिक ईमानदारी दिखाई है, वो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक मिसाल बन चुकी है। सत्ता की चाह नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों और संविधान की रक्षा उनका असली मक़सद है।
"वोट चोरी" पर उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने जिन दस्तावेज़ों और सबूतों के साथ चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं, वो किसी भी जांच से बच नहीं सकते।
राहुल गांधी और उनकी टीम ने मैन्युअली जो गड़बड़ियों को पकड़ा है, वह दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी रिगिंग के तौर पर सामने आ रहा है।
सबसे बड़ी बात — उन्होंने चुनाव आयोग को सीधी चुनौती दी है: वोटर लिस्ट की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी सार्वजनिक करें।
जब आयोग राहुल गांधी से एफिडेविट मांग रहा है, तो क्या उसे खुद ये नहीं कहना चाहिए कि अगर इल्ज़ाम सही निकले, तो दोषी अफसरों को सज़ा दी जाएगी?
राहुल गांधी की यह लड़ाई सिर्फ एक नेता की नहीं, बल्कि हर उस भारतीय की है जो लोकतंत्र में यक़ीन रखता है।
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