सैय्यद अनवर कादरी
छत्रपति संभाजीनगर, औरंगाबाद, महाराष्ट्र।
छत्रपति संभाजीनगर, केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार के संयुक्त प्रयास से अनुदानित खाद वितरण व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए "नेशनल फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल" नामक पायलट परियोजना 5 जून से छत्रपति संभाजीनगर जिले में शुरू की जा रही है। इस परियोजना के लिए राज्य में केवल छत्रपति संभाजीनगर और कोल्हापुर जिलों का चयन किया गया है।
जिलाधिकारी विनय गौडा जी.सी. ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस नई प्रणाली की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में कृषि विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी दीपक गवली ने परियोजना की विस्तृत जानकारी दी।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
इस परियोजना के तहत किसानों को "Framework For Fertilizer Sale" मोबाइल ऐप के माध्यम से अनुदानित खाद की बुकिंग करनी होगी। ऐप में किसान आधार सत्यापन के बाद अपनी भूमि और फसल की जानकारी दर्ज करेंगे। इसके आधार पर उन्हें सरकारी सिफारिश के अनुसार खाद की सूची उपलब्ध होगी।
खाद बुक करने के बाद किसान को एक QR कोड और टोकन नंबर मिलेगा। चुने गए कृषि सेवा केंद्र पर यह खाद तीन दिनों तक किसान के नाम पर आरक्षित रहेगी। किसान अपनी सुविधा के अनुसार केंद्र पर जाकर QR कोड स्कैन कर खाद प्राप्त कर सकेंगे।
किसानों को होंगे ये लाभ
खाद खरीदने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी।
नजदीकी विक्रेताओं के उपलब्ध स्टॉक की जानकारी ऐप पर मिलेगी।
खाद का पारदर्शी और समान वितरण सुनिश्चित होगा।
अनुदानित खाद के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
प्रत्येक खाद बैग की खरीद का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
ऐप के उपयोग की प्रक्रिया
आधार नंबर और OTP के जरिए लॉगिन करें।
भूमि का विवरण दर्ज करें।
फसल और मौसम (खरीफ, रबी, ग्रीष्म) चुनें।
आवश्यक खाद का चयन करें।
खाद की मात्रा निर्धारित करें।
नजदीकी विक्रेता चुनें।
स्वयं या प्रतिनिधि का विवरण दर्ज करें।
QR कोड और टोकन प्राप्त करें।
विक्रेता के पास जाकर QR कोड दिखाकर खाद प्राप्त करें।
जिलाधिकारी की अपील
जिलाधिकारी विनय गौडा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को सरल भाषा में ऐप का उपयोग समझाया जाए और खाद विक्रेताओं को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से जोड़ा जाए ताकि नई प्रणाली का लाभ हर किसान तक पहुंच सके।
किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या होने पर संबंधित कृषि अधिकारी या तालुका कृषि कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
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