शहाबुद्वीन अहमद
बेतिया,पश्चिमी चंपारण, बिहार।

जिले अंतर्गत विद्यालयों से गायब रह रहे छात्र/छात्रों का नामांकन रद्द किया गया है, जिनकी संख्या 1लाख 12 हजार 270 बताई गई है, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या मझौलिया प्रखंड के विद्यालयों का है,इसी तरह अन्य प्रखंडों के विद्यालयों का भी यही स्थिति बनी हुई है।शिक्षा विभाग के सचिव,के के पाठक के द्वारा विद्यालयों,शिक्षकों को सुधारने के लिए बहुत सारे कदम उठाए जा रहे हैं,जिनमें विद्यालयों से गैरहाजीर रह रहे छात्र-छात्राओं का उस विद्यालय से नामांकन रद्द कर दिया जा रहा है,साथ ही शिक्षकों को भी यह हिदायत दी जा रही है कि जो बच्चे एक महीना से ज्यादा से अगर विद्यालय से गायब रहते हैं,तो उनका नामांकन रद्द कर दिया जाए,साथ ही उन्हें सभी सरकारी लाभान्वित योजनाओं से भी वंचित कर दिया जाए,इस तरह के फरमान जारी करने से सभी लोगों के बीच,छात्र-छात्राओं,उनके परिजनों,माता-पिता,गार्जियन व शिक्षकों पर विद्यालयों के प्रति जिम्मेवारी बढ़ती जा रही है। फरमान के अंतर्गत तो यह भी जारी हुआ है कि जिन छात्र छात्राओं की उपस्थिति 75% से कम होगी उनका परीक्षा में बैठने की इजाजत नहीं होगी, और नहीं किसी तरह का फॉर्म उनका भरा जाएगा। इस तरह के आदेश जारी होने से छात्र छात्राओं, शिक्षकों, माता, पिता को सुधारने का मौका मिल जाएगा, साथ ही शिक्षा एवं विद्यालय के प्रति मानसिकता बदलेगी। शिक्षा विभाग के सचिव के के पाठक के द्वारा कुछ ऐसे भी कदम उठाए जा रहे हैं,जो सभी स्तर के हित में है,जिससे सुधार होने की संभावनाअधिक बन रही है, मगर कुछ ऐसे भी कदम उठा लिए जा रहे हैं,जो शिक्षा, शिक्षक,विद्यालय के हित में नहीं नजर आ रही है, यह अलग बात है कि विगत कई वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में गिरावट आई हुई है जिसमें कई खामियां नजर आई है,इसमें शिक्षक से लेकर छात्र-छात्राएं, उनके गार्जियन,माता पिता, निरीक्षण पदाधिकारी सभी जिम्मेदार हैं। इस बिगड़े हुए परिवेश को सुधारना इतनी जल्दी संभव नहीं हो सकेगा, मगर जब सभी लोग प्रयासरत रहेंगे तो आने वाले दिनों में शिक्षा का मुकाम ऊंचा हो जाएगा।
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