बलिया, उत्तर प्रदेश।
आपके सामने एक नन्हा पौधा है और एक बड़ा सा बृक्ष। किसे ज्यादा देखभाल की जरूरत है? किसे ज्यादा खाद ,पानी धूप ,रोशनी की जरूरत है? किसे आंधी तूफान,बारिश से बचाने की जरूरत है? किसे प्रेम और कोमलता से सहेजे जाने की जरूरत है? जाहिर है उस नन्हें पौधे को ताकि कल एक मजबूत,घना,हरा वृक्ष बन सके।वैसे ही हमारे बच्चें। नन्हें पेड़ की तरह,जो सही शिक्षा मिलने पर काबिल ,नैतिक और जिम्मेदार नागरिक बन सकते है।
चार साल की उम्र में बच्चा मां की गोंद से निकलकर दुनिया में कदम रखता है। उस वक्त उसके जीवन में सबसे अहम भूमिका निभाने की जिम्मेदारी शिक्षक की होती है।शिक्षक जितना प्रशिक्षित,समझदार और संवेदनशील होगा, बच्चों पर उतना ही सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
एक शिक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं बल्कि बच्चें का सर्वांगीण विकास करना होता है।सवाल यह भी है कि वह कितना चरित्रवान है। उसमें कितनी करुणा, उदारता,मनुष्यता और जिम्मेदारी की भावना है।एक बच्चें को ये सब चीजें सीखना और भविष्य का बेहतर नागरिक बनाना एक शिक्षक की जिम्मेदारियों का हिस्सा है।लेकिन यह तब तक मुमकिन नहीं,जब तक देश और समाज भी शिक्षक के प्रति अपनी जिम्मेदारी न निभाएं। वे बेहतर शिक्षक तभी हो सकते है ,जब उनके काम की परिस्थितियां बेहतर हो। उन्हें सामाजिक,आर्थिक सुरक्षा मिले।उनकी नौकरी सुरक्षित हो।उन्हें उनके श्रम का उचित सम्मान मिले।उनकी सर्विस कंडीशन बेहतर हो।तभी वह अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन कर सकता है।
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