सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए करें उमराह - हाफिज रहमत अली
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में उलमा किराम द्वारा उमराह प्रशिक्षण दिया गया। अल कलम एसोसिएशन व ट्रैवेल प्वाइंट हज, उमराह व जियारत की ओर से आयोजित प्रशिक्षण शिविर में हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि उमराह एक रूहानी सफर है, जो सच्चे दिल से अल्लाह की रजा, गुनाहों की माफी, ईमान मजबूत करने और सुकून पाने के लिए किया जाता है। उमराह पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है। उमराह में मुसलमान दुनियावी चिंताओं से दूर होकर अल्लाह की इबादत करता है। उमराह से आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक नवीनीकरण होता है। उमराह पिछले गुनाहों को धोने और अल्लाह से माफी मांगने का एक जरिया है। उमराह में पुरुषों को दो सफेद (एहराम), बिना सिला हुआ कपड़ा पहनना होता है। महिलाओं को सामान्य इस्लामी कपड़ा पहनना होता है। उमराह में काबा शरीफ के चारों ओर सात बार चक्कर लगाना होता। सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच सात बार आना-जाना (सई) होता है। इसके बाद पुरुषों का सिर मुंडवाना (हल्क) या बाल छोटे करना (तकसीर) और महिलाओं का सांकेतिक रूप से बाल काटना होता है। उमराह में अल्लाह के करीब आने, उससे दुआएं मांगने और उसके साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का अवसर मिलता है। उमराह भाईचारे और एकता का प्रतीक है। उमराह में सभी तीर्थयात्री एक जैसे साधारण वस्त्र (एहराम) पहनते हैं, जो अल्लाह के सामने सभी मुसलमानों की समानता और विनम्रता को दर्शाता है।
संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि उमराह सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि एक गहन रूहानी अनुभव है जो बंदे को अल्लाह के करीब लाता है और उन्हें अपने ईमान को मजबूत करने का मौका देता है। उमराह से दुनिया व आखिरत में रहमत व बरकत हासिल होती है। उमराह अल्लाह के करीब जाने, उससे दुआ करने और दिली सुकून पाने का एक बेहतरीन जरिया है। उमराह से रूह पाक होती है। यह एक प्यारी सुन्नत है जिसे पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने खुद कई बार किया है। उमराह करने से अल्लाह की रजा और रहमत हासिल होती है। पिछले गुनाह माफ हो जाते है। ईमान मजबूत होता है। अल्लाह के साथ जुड़ाव गहरा होता है। उमराह छोटे गुनाहों का कफ्फारा (प्रायश्चित) है। उमराह करने वाले अल्लाह के मेहमान होते हैं और उनकी दुआएं कबूल होती हैं। उमराह की शुरुआत से ही अल्लाह की खूब इबादत करें। खूब तौबा भी करें।
प्रशिक्षण का समापन भारत में अमन ओ अमान की दुआ के साथ किया गया। प्रशिक्षण में नेहाल अहमद नक्शबंदी, आसिफ महमूद नक्शबंदी, जीशान अहमद, मुहम्मद अख्लाक, ताबिश सिद्दीकी, शहबाज सिद्दीकी, शिफा खातून सहित तमाम लोग शामिल हुए।
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