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तीसरा अशरा शुरु : मस्जिदों में एतिकाफ का आगाज।

शबे कद्र की पहली ताक रात में खूब हुई इबादत 

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

माह-ए-रमजान का तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का शुरु हो चुका है। इफ्तार से पहले शहर की तमाम मस्जिदों में रोजेदारों ने एतिकाफ शुरु कर दिया। एतिकाफ करने वाले इबादत में मश्गूल हो गए। सब्जपोश हाउस मस्जिद में कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी के नेतृत्व में छोटे-छोटे करीब दस बच्चों ने एतिकाफ शुरु किया। इबादत का यह सिलसिला ईद के चांद तक जारी रहेगा। मुसलमानों ने शबे कद्र की पहली ताक रात में खूब इबादत की। अल्लाह के बंदों ने इबादत कर गुनाहों की माफी मांगी। शबे कद्र की पहली ताक रात में मस्जिद व घरों में खूब इबादत हुई। मगरिब की नमाज के बाद इबादत का यह सिलसिला सुबह की फज्र नमाज तक चलता रहा। लोगों ने फर्ज व सुन्नत नमाजों के साथ कसरत से नफ्ल नमाजें अदा की। कुरआन-ए-पाक की तिलावत व तस्बीह पढ़ी। घरों में महिलाएं भी इबादत में मश्गूल रहीं। जहन्नम से आजादी की दुआ मांगी गई। अब शबे कद्र को रमजान की 23, 25, 27, 29वीं की ताक रात में तलाशा जाएगा। वहीं फिरदौस जामा मस्जिद जमुनहिया बाग सहित शहर की एक दर्जन से अधिक मस्जिदों में तरावीह नमाज के दौरान एक कुरआन-ए-पाक मुकम्मल हो गया। जमुनहिया बाग गोरखनाथ में अल कलम एसोसिएशन की ओर से 'किताबें बुला रही हैं' नाम से दीनी किताबों का स्टॉल लगाया गया। लोगों ने किताबों के प्रति काफी दिलचस्पी दिखाई। स्टॉल लगाने में असिफ महमूद, मौलाना अनवर अहमद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, हस्सान आदि ने महती भूमिका निभाई।

माह-ए-रमजान में फर्ज, वाजिब व सुन्नत नमाजों के अलावा तहज्जुद, इशराक, चाश्त, अव्वाबीन, सलातुल तस्बीह आदि नफ्ल नमाजें भी खूब पढ़ी जा रही हैं। सभी के सिरों पर टोपी व हाथों में तस्बीह नजर आ रही है। मिस्वाक, खजूर व इत्र का खूब इस्तेमाल हो रहा है। रोजेदार दिन में रोजा रखकर व रात में तरावीह की नमाज पढ़कर अल्लाह का फरमान पूरा कर रहे हैं। अल्लाह का फरमान पूरा करने के बदले में रोजेदारों को ईद का ईनाम मिलेगा। मंगलवार को 20वां रोजा अल्लाह की हम्द ओ सना में बीता। करीब 13 घंटा 20 मिनट का लंबा रोजा रोजेदारों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। बाजार में रौनक बढ़ गई है। ईद की खरीदारी में तेजी है। सेवईयों की बिक्री भी जोर पकड़ चुकी है। 

सब्जपोश हाउस मस्जिद में फतह मक्का पर हुआ बयान

20 रमजानुल मुबारक को मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में फतह मक्का को याद करते हुए गोष्ठी हुई। हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि फतह मक्का के बाद मक्का शरीफ को दारुल अमन यानी शांति का घर घोषित किया गया और यह सब पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हाथों किया गया जिन्हें पूरे संसार के लिए रहमत बनाकर भेजा गया है। फतह मक्का विश्व इतिहास की बड़ी ही अद्भुत घटना है। दुनिया ने देखा कि आपने सबको माफ कर एक अनोखी मिसाल पेश की। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इस फैसले से लोग दीन-ए-इस्लाम के दामन से जुड़ते चले गए। 

कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि फतह मक्का एक शानदार फतह थी। जो रमजानुल मुबारक की 20 तारीख को हुई। यह एक ऐसी फतह थी कि जिसमें कोई मारा नही गया। बल्कि सही मायने में सबको बेहतरीन जिंदगी मिली। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फतह मक्का से लोगों का दिल जीत लिया। सभी को आम माफी दी गई। तारीख में इससे अनोखा वाकया कहीं नहीं मिलता। खून का एक कतरा भी नहीं गिरा और फतह अजीम हासिल हो गई। मक्का की फतह अरब से मुशरिकीन के मुकम्मल खात्मे की शुरुआत साबित हुई। मक्का की फतह के बाद पैगंबर-ए-इस्लाम ने वहां के लोगों से शिर्क न करने, जिना न करने, चोरी न करने की शर्त पर बैअत ली और उन्हें अपने-अपने बुतों को तोड़ने का हुक्म दिया। पैगंबरे इस्लाम ने किसी पर जुल्म नहीं किया। सबको अमान दे दिया। अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर पूरी दुनिया में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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