सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
माह-ए-रमजान सब्र, भलाई, रहमत और बरकत का महीना है। रमजान में मुसलमान गरीब, असहाय और जरूरतमंदों का ख्याल रख कर उनकी मदद कर रहे हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों व लोगों द्वारा जरूरतमंदों में राशन किट बांटा जा रहा है। शहर में छोटे काजीपुर, रेती आदि जगहों पर इफ्तार प्वाइंट बनाया गया है जहां जरूरतमंदों को इफ्तार बांटी जा रही है। रमजान में अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ कर उन्हें जहन्नम से आजादी का परवाना अता करता है। माह-ए-रमजान की सुबह-शाम खैर ओ बरकत में गुजर रही है। तरावीह की नमाज का सिलसिला जारी है। कई मस्जिदों में तरावीह नमाज के दौरान एक कुरआन-ए-पाक मुकम्मल हो चुका है। पूरी दुनिया में अमन ओ अमान की दुआ मांगी जा रही है। रमजान का मुबारक महीना और फिजा में घुली रूहानियत से दुनिया सराबोर हो रही है, ऐसा लगता है कि चारों तरफ नूर की बारिश हो रही हो। साढ़े छह गली नखास में इत्र व टोपी की खूब बिक्री हो रही है। अख्तर आलम ने बताया कि रमजान में उनके यहां तमाम तरह के इत्र व अलग-अलग किस्म की टोपियां बिक रही हैं।
रमजान अल्लाह की इबादत का महीना : हाजी खुर्शीद आलम
इलाहीबाग के समाजसेवी हाजी खुर्शीद आलम खान ने कहा कि अल्लाह ने हर अमल का दुनिया में ही बदला बता दिया कि किस अमल पर क्या मिलेगा मगर रोजा के बारे में इरशाद फरमाया कि मैं खुद ही इसका बदला दूंगा या फरमाया कि मैं खुद ही रोजा का बदला (जजा) हूं। रमजान अल्लाह की इबादत, इताअत और लोगों के साथ हमदर्दी व गमगुसारी और कुरआन का महीना है।
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