शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया,पश्चिमी चंपारण, बिहार।
वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री के निर्देश पर सभी सांसदों को अपने-अपने संसदीय क्षेत्र से, सांसदआदर्श ग्राम योजना के तहत एक एक गांव गोद लेना था,जिससे उस गांवों का चतुर्दिक विकास करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम तय किया गया था,मगर बहुत ही खेद के साथ लिखना पड़ता है किसी भी सांसद नेअपने क्षेत्र से लिए गए एक गांव का विकास तो दूर झांकना तक पार नहीं लगा,विकास की बात तो दूर। यहां तक के स्थानीय सांसद ने भी एकअपने संसदीय क्षेत्र से आदर्श ग्राम योजना के तहत एक गांव को गोद लिया था,मगर आज तक उस गांवों के किसी भी क्षेत्र में किसी भी स्तर से कोई विकास नहीं हुआ,यहां तक कि वह गांव विनाश की ओर चला गया। गांव के विकास के लिए बहुत सारे कार्यक्रम तय किया गया था,जिसमें से एक का भी असर देखने को नहीं मिला। स्थानीय सांसद को विकास हेतु जितनी राशि प्रति वर्ष आवंटित होती है,इसका एक चौथाई भी खर्च नहीं होता है,सबआवंटित राशि कहां चली जाती है,इसका कोई लेखा-जोखा आम जनता के सामने नहीं मिलता है।
जिस उद्देश्य के तहत प्रधानमंत्री के द्वारा यह आदर्श ग्राम योजना कार्यक्रम चलाने काआवाहन किया गया था,वह मात्र दिखावा था,स्थानीय सांसद के द्वारा भी अपने पूरे कार्यकाल में सिर्फ दिखावा ही किया,अगर काम किया होता तोआज इस बेतिया शहर की स्थिति के साथ क्षेत्र की विकास भी देखने को मिलता, मगर बहुतअफसोस है कि उनके कार्यकाल का 10 वर्ष पूरा हो गया,पुनःसंसद का चुनाव होने जा रहा है,देखना यह होगा कि स्थानीय सांसद का इस चुनाव में क्या नतीजा सामने आता है,यह आने वाला समय ही बता पाएगा।
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