नौरंगाबाद व तुर्कमानपुर में दर्स-ए-कुरआन का दूसरा सप्ताह
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर व जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद गोरखनाथ में इस्लामी बहनों के लिए साप्ताहिक दर्स-ए-कुरआन (व्याख्यान) के दूसरे सप्ताह में सूरह फील पर रौशनी डाली गई।
मुख्य वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि अल्लाह की शक्ति सर्वोपरि है। असत्य पर सत्य की विजय हमेशा निश्चित है। अल्लाह अपने दीन और पवित्र स्थानों की रक्षा करने में सक्षम है। सूरह फील पवित्र कुरआन की 105वीं सूरह है, जो मक्का में नाजिल हुई। यह सूरह यमन के शासक अब्राह की हाथी सेना द्वारा काबा को नष्ट करने के विफल प्रयास का वर्णन करती है। अल्लाह ने अबाबील (छोटे पक्षियों) के माध्यम से कंकरियां बरसाकर उस शक्तिशाली सेना को नष्ट कर दिया, जो असत्य पर सत्य की विजय और अल्लाह द्वारा अपने घर (काबा) की सुरक्षा को दर्शाता है। यह सूरह स्पष्ट करती है कि अल्लाह की शक्ति के सामने कोई ताकत कुछ भी नहीं है। अल्लाह ने बहुत छोटे पक्षियों के जरिए उस घमंडी सेना को कुचले हुए भूसे की तरह नष्ट कर दिया।
विशिष्ट वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि सूरह फील में अल्लाह ने उस ऐतिहासिक घटना का वर्णन किया है जब अल्लाह ने चमत्कारिक ढंग से काबा की रक्षा की। यह सूरह यमन के शासक अब्राह की उस शक्तिशाली सेना के बारे में है, जो हाथियों (फील) के साथ काबा को ढहाने के लिए आई थी। अब्राह के पास विशाल सेना और हाथी थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें नष्ट करने के लिए छोटे-छोटे अबाबील (पक्षियों) का झुंड भेजा। जिससे यह साबित हुआ कि कोई भी ताकत अल्लाह के घर को नुकसान नहीं पहुंचा सकती है। यह घटना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्म से लगभग पचास दिन पहले हुई थी। सूरह फील सिखाती है कि सत्य हमेशा असत्य पर विजय प्राप्त करता है, चाहे शत्रु कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो। इसका पाठ शत्रुओं से सुरक्षा और चिंताओं को दूर करने के लिए भी किया जाता है।
अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क की खुशहाली व तरक्की की दुआ मांगी गई। दर्स में शीरीन आसिफ, आयशा खातून, सैयदा यासमीन, नाजिया खातून, ज्या वारसी, शिफा खातून, सना फातिमा, फिजा खातून, शालिबा, मुबस्सिरा, आस्मा खातून, नूरजहां, फिजा खातून, सानिया, अदीबा, गुलफिशा सहित तमाम इस्लामी बहनों की सहभागिता रही।
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