भ्रष्टाचार के तपिश में खाक हुआ जीरो टॉलरेंस।
- भ्रष्टाचार की सरदार बनी सरकार
सेराज अहमद कुरैशी
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
कथित पारदर्शी व्यवस्था व भ्रष्टाचार मुक्त दावे की सरकार के असलियत को तीसरी आंख मानवाधिकार संगठन के सत्याग्रहियों द्वारा कैग रिपोर्ट आधारित भ्रष्टाचार, अपात्र व नाबालिक की फर्जी नियुक्ति, निर्धारित नीति के विपरीत सम्बधिकरण व स्थानांतरण, कथित कार्य मद,एक्स्ट्रा आइटम बांड, आपूर्ति आदेश,कार्य आदेश,टीआई व पीआई के माध्यम से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के किए गए आर्थिक व वित्तीय अनियमितता के विरुद्ध वर्ष 2021 से सीएम सिटी गोरखपुर में स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय पर प्रचलित सत्याग्रह संकल्प ने अहिंसात्मक आंदोलन की एक अनूठी मिसाल पेश की है। परंतु बेशर्म बेगैरत सरकार के कानों में इस अनूठी मिसाल की गूंज अब तक सुनाई नहीं दी।
जबकि वर्तमान बेशर्म बेगैरत सरकार ने सीएजी रिपोर्ट आधारित भ्रष्टाचार पर पूर्ववर्ती सरकारों को सत्ता से बेदखल किया था। भ्रष्टाचार के नशे में डूबे वर्तमान सरकार को उस नजीर से
सीख लेने की आवश्यकता है कि निरंकुश भ्रष्टाचार की बाढ़ में कहीं वर्तमान सरकार भी सत्ता से बेदखल ना हो जाए।
बताते चलें कि तीसरी आंख मानव अधिकार संगठन एकमात्र ऐसा संगठन है जिसने वर्ष 2000 से हर जोर,जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ अनवरत एक बुलंद आवाज से आगाज करती चली आ रही है इस आगाज की कुछ नजीरें जैसे महानगर के विभिन्न विभागों में कतिपय भ्रष्ट व लोक उपेक्षा करने वाले लोक सेवकों को अंजाम तक पहुंचने में एक अविस्मरणीय योगदान पेश की है। वर्तमान भ्रष्टाचार की बनी सरदार सरकार को ऐसे सशक्त धरातल पर कार्य करने वाली संगठन के सत्याग्रहियों को नजरअंदाज करना उनके सत्ता में बने रहने के लिए शुभ संकेत नही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रचलित सत्याग्रह पर बैठे सत्याग्रहियों की उपेक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक काला बदनुमा दाग है और इसकी कहीं ना कहीं मूल जिम्मेदार वर्तमान सत्ताधारी भ्रष्ट शासक हैं।
सत्याग्रहियों का कहना है कि वर्तमान सरकार का कथित भ्रष्टाचार व अपराध मुक्त का दावा निराधार है क्योंकि वर्तमान संगठित शासकीय प्रशासकीय तंत्र ने जन सामान्य की अभिव्यक्ति पर कुठाराघात हमला कर, वर्तमान समय में शासकीय प्रशासकीय तंत्र अपराध में एक अमूक रोल अदा करता नजर आ रहा है।
वर्तमान सरकार का परिदृश्य यह है कि शासन प्रशासक लोक सेवक की जगह मूकबघिर लोक शासक बन चुके हैं ऐसे में लोकतंत्र का वजूद मूल स्वरूप से विरत हो चुका है।
जो लोकतंत्र के लिए किसी अशुभ संकेत से कम नहीं है। बड़े खेद के साथ
सत्याग्रहियों का कहना है कि भ्रष्टाचार जैसे विभीषिका के विरुद्ध विगत तीन सालों से चलाए जा रहे सत्याग्रह संकल्प में समाज के बड़े चौथे स्तंभ या प्रबुद्ध वर्गों के उपेक्षा का परिणाम है कि सत्याग्रह अनवरत अब तक प्रचलित है और निरंकुश भ्रष्टाचार का भी तांडव प्रचलित है।
अनवरत प्रचलित सत्याग्रह संकल्प पर हमारे संवाददाता ने विगत 3 वर्षों में देखा कि कडाके की ठंड, तपती गर्मी,भारी बरसात और हीट वेव जैसे विषम परिस्थितियों का किस तरह से सामना करते हुए अब सत्याग्रहियों ने इस अहिंसात्मक सत्याग्रह को सम्भाला है वह एक काबिले तारीफ होने के साथ-साथ सत्याग्रहियों के धैर्य,कठोर परिश्रम, दृढ संकल्प और कठोर तप का परिचायक है जिसे नवाजने के शायद शब्दकोश में कोई शब्द मौजूद नहीं है। यह सोचने पर आज सहज विवश होना पड़ रहा है कि आज भौतिक व पाश्चात सभ्यता के दौर में भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलन के पदचिन्हों पर चलने वाले सत्याग्रही इस भारत देश के उत्तर प्रदेश में जीवित हैं, जो अहिंसात्मक आंदोलन को जिंदा रखे हुए हैं, यह उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय बनता है।
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