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प्रथम स्वाधीनता संग्राम सन 1857 की 167वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा एवं कवि सम्मेलन।

क्रांतिवीर शहीद सरदार अली खान ने गोरखपुर को अंग्रेजों से 6 महीने के लिए आजाद कर दिया था- प्रो.कृष्ण कुमार पांडेय

कवियों ने अपनी कविता के माध्यम से शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि। 

सेराज अहमद कुरैशी 

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

क्रांतिवीर शहीद सरदार अली खान फाउंडेशन गोरखपुर के द्वारा प्रथम स्वाधीनता संग्राम सन 1857 की 167वीं वर्षगांठ के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन शहादत स्थल कोतवाली परिसर गोरखपुर में आयोजित किया गया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ई.एम.पी कंदोई ने कहा कि क्रांतिवीर शहीद सरदार अली खान एक महान क्रांतिकारी थे जिन्होंने अंग्रेजों के प्रलोभन को ठोकर मार दिया और देश को आजाद करन के लिए शहीद हो गये परिवार के अधिकतर लोगों के साथ जिनकी कब्र (समाधि)आज भी कोतवाली परिसर और आसपास मौजूद हैं |

मुख्यअतिथि डॉक्टर सत्या पांडेय ने संबोधित करते हुए कहा कि शहीद सरदार अली खान जिन्हें गोरखपुर भूल चुका है वह इतिहास के पन्नों में आज भी अमर हैं और सरकार जैसे समीप में स्थित योगानंद जन्मास्थली को स्मारक बना रही है उसी प्रकार कोतवाली परिसर में स्थित शहीद सरदार अली खान की मजार को भी स्मारक के रूप में विकसित किया जाना चाहिए जिससे गोरखपुर के लोग उनके त्याग और बलिदान से परिचित हो सके |

सुप्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. कृष्ण कुमार पांडेय ने संबोधित करते हुए कहा कि शहीद सरदार अली खान जिन्होंने तन मन धन से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मे न सिर्फ भाग लिया बल्कि गोरखपुर को 6 महीने के लिए अंग्रेजों से आजाद करने में सफलता पाई |

विशिष्ट अतिथि सरदार जसपाल सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि आज समय की मांग है कि ऐसे महान क्रांतिकारी के उपेक्षित स्मारक को एक भव्य रूप दिया जाए ताकि युवा वहां से प्रेरणा ले सकें |

साथ ही साथ हाजी जियाउल इस्लाम आदि ने भी संबोधित किया |

कार्यक्रम के संयोजक सरदार अली खान के वंशज पांचवीं पीढ़ी के मुख्तार खान ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों को सरकार के द्वारा वह सम्मान व स्थान नहीं दिया गया जो उन्हें मिलना चाहिए था |

कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए मिन्नत गोरखपुरी ने पढ़ा-

जिनके जतन से हमने यह आजादी पाई है |

ऐसे शहीदों को शत-शत नमन हमारा है || लोगों ने खूब तालियां बजाई

प्रेमनाथ मिश्रा ने पढ़ा-

हर धड़कन पर देश लिखा हो दिल में यह अरमान रहे ।

युगों - युगों तक ध्वजा तिरंगा भारत की पहचान रहे ।।

डॉक्टर सरिता सिंह ने पढ़ा-

गंग-जमन तहजीबो वाला, अपना देश निराला ।

भांति-भांति के जाति धर्म औ,पंथ को इसने पाला।

आशिया गोरखपुरी ने पढ़ा-

लहू से अपने सींचा है शहीदों ने हिंदुस्तान,

कि हिंदुस्तान की जमीन ही में शहीदों की मजारे है l

शिवांगी मिश्रा ने पढ़ा-

सब लोग करो इस वतन की हिफाजत 

मेरा तिरंगा भी एक है और वतन एक है |साथ ही साथ सुभाष चंद्र यादव, अजय यादव, रुद्र उत्कर्ष शुक्ला, गौतम गोरखपुरी,उत्कर्ष पाठक आदि ने काव्य पाठ किया |

इस अवसर पर शमशाद आलम,शिराज अहमद खान, मसूद अहमद खान ,शब्बीर अहमद खान ,मेराज अहमद खान,महमूद खान,अशफाक हुसैन मकरानी ,लड्डन खान,फजल खान,रामप्रकाश, समीर खान, सैय्यद इरशाद अहमद हिफजुर रहमान अजमल एडवोकेट, अनिस जफर खान,सिराज अहमद खान, राजू. अंजली, आयान, आमान आदि मौजूद रहे |

कार्यक्रम के साथ संयोजन शिराज खान ने सभी को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया |

Karunakar Ram Tripathi
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